ये लो, अब करो प्यारी

आज शाम घर में कुछ ज़्यादा ही मस्ती चल रही थी। देखता हूँ कि भाग-दौड़ मची है — आर्यन आगे आगे और उसकी मैया पीछे पीछे।

अ — बस मैया, प्यारी-वयारी कुछ नहीं।

मैया — अच्छा, बस एक।

(पिछले कुछ दिनों से आर्यन को एक नई शरारत सूझी है — कोई उसे चूम ले तो वो तुरंत हाथ से पोंछकर हँसते हुए कहता है, “लो, तुम्हारी प्यारी साफ़।”)

अ — बस बस...

मैया — अच्छा, तू ही बता दे कहाँ प्यारी दूँ जो तू साफ़ नहीं करेगा।

आर्यन कुछ देर सोचता रहा।

“टिक टाक... टिक टाक...”

फिर अपने पैरों के तलवों की तरफ़ इशारा करके बोला,

“ओके, यहाँ मैया... यहाँ करो प्यारी।”

“अरेरेरे!” कहते हुए मैया पीछे हट गई।

और फिर शुरू हुई एक और भाग-दौड़ —

बस इस बार बेटा पीछे पीछे था और मैया आगे आगे। :)

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